न्यायपालिका में बुनियादी सुधारों को लेकर दांडी मार्च की तर्ज पर ग्वालियर में निकाला गया न्यायिक मार्च..

न्यायपालिका में बुनियादी सुधारों को लेकर दांडी मार्च की तर्ज पर ग्वालियर में निकाला गया न्यायिक मार्च..

Gwalior.. महात्मा गांधी के दांडी मार्च की तर्ज पर ग्वालियर के कुछ बुद्धिजीवियों और न्याय प्रेमियों ने न्याय मित्र के रूप में आज एक मार्च निकाला …मार्च निकालने वाले लोग न्यायपालिका में बुनियादी सुधार लागू किए जाने की मांग कर रहे थे ..और बाकायदा उन्होंने अपने संगठन फ्रेंड्स फॉर जस्टिस के नाम से मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ के प्रिंसिपल रजिस्टर को एक ज्ञापन भी सौंपा.. जिसमें गुजारिश की गई की इस ज्ञापन की प्रति को माननीय सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रपति को प्रेषित कर दिया जाए..

“न्यायपालिका में बुनियादी सुधार”‘ इस विषय पर शनिवार को ग्वालियर में एक जन संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया था.. और इस जनसंवाद में मुख्य उद्बोधन लखनऊ पीठ की इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायमूर्ति जस्टिस रंगनाथ पांडे का था.. जस्टिस पांडे अभी हाल ही में इसलिए ज्यादा चर्चित हैं कि उन्होंने भारत सरकार के प्रधानमंत्री को न्यायपालिका की दुर्दशा पर पत्र लिखने की साफगोई और हौसला दिखाया है.. उन्हीं की मांग और न्यायपालिका में बुनियादी सुधारों की मांग को लेकर ग्वालियर के बुद्धिजीवियों ने ग्वालियर के बाल भवन परिसर के पास से एक न्यायिक मार्च निकाल कर हाई कोर्ट के प्रिंसिपल रजिस्टार के बंगले तक कदमताल की और रजिस्ट्रार महोदय को ज्ञापन सौंपा…

. दांडी मार्च की तर्ज पर न्यायिक मार्च निकालने वाले बुद्धिजीवियों में डॉक्टर, वकील समाजसेवी एवं अन्य श्रेणी के लोग शामिल थे.. फ्रेंड्स फ्रेंड्स फॉर जस्टिस संस्था के कर्ता-धर्ता ओं का कहना था कि न्यायपालिका में उच्च न्यायिक सेवा में भर्ती की सेवा शर्तों में पारदर्शिता रखी जाए और हाई कोर्ट जजों के चयन में योग्यता को वरीयता दी जाए ..

..साथ ही उच्च न्यायिक सेवा में चयन होने के समय उनके इंटरव्यू का प्रसारण लाइव टीवी चैनल पर हो.. जिससे कि पूरे देश के सामने उनके चयन की प्रक्रिया को देखा जा सके। इसके अलावा कई अन्य मुद्दे भी न्यायपालिका में सुधार को लेकर फ्रेंड्स फॉर जस्टिस के लोगों ने उठाए हैं…
.डॉ अरविंद दुबे–कार्यक्रम संयोजक..

. आज निकाले गये न्यायिक मार्च में इस बात का ध्यान रखा गया था,, कि ज्ञापन छुट्टी के दिन दिया गया ,और वह भी हाईकोर्ट के प्रिंसिपल रजिस्ट्रार के बंगले पर जाकर, क्योंकि इस तरह के आंदोलन की मशाल जलाने वाले लोगों का मानना है कि वे न्यायमूर्ति गण का बेहद सम्मान करते हैं ..और उनकी तनख्वाह बढ़ाने की वकालत भी करते हैं ..ताकि वे निष्पक्षता से न्याय कर सके। और मामलों का शीघ्र निराकरण हो सके” इसके अलावा उन्होंने हाई कोर्ट परिसर पहुंचकर या हाई कोर्ट जजों के बंगलों पर जाकर ज्ञापन देने से भी परहेज किया है ..उनकी सोच है कि यह सब न्यायपालिका और न्यायाधीशों की गरिमा को देखते हुए किया गया है ..इस तरह का आंदोलन और मार्च अब हाईकोर्ट की अन्य अलग-अलग खंडपीठ में करने का ऐलान भी फ्रेंड्स फॉर जस्टिस के सदस्यों ने किया है.. न्यायिक मार्च में आईटीएम यूनिवर्सिटी के चांसलर रमाशंकर सिंह ,सामाजिक कार्यकर्ता राजवीर सिंह राठौर, डॉ.. सुनील अग्रवाल सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता व बुद्धिजीवी शामिल हुए थे..

जावेद खान …

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *