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ग्वालियर शहर में निजी स्कूलों का गोरख धंधा.. छोटे से भवन में मिडिल स्कूलों का संचालन..

ग्वालियर शहर में निजी स्कूलों का गोरख धंधा..
छोटे से भवन में मिडिल स्कूलों का संचालन..


मान्यता नियमों के साथ खिलवाड़ ..
डीपीसी ने जांच कराने का दिया भरोसा..

– ग्वालियर जिले में संचालित निजी स्कूलों पर स्कूल शिक्षा विभाग कोई लगाम नहीं लगा पा रहा है ..जिसकी वजह से मिडिल और हायर सेकेंडरी स्कूल दो-दो कमरे के स्थान या छोटे से क्षेत्रफल में संचालित हो रहे हैं ..जबकि मध्य प्रदेश सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग के मान्यता नियम के अनुसार खेल मैदान से लेकर कक्षों की पर्याप्त संख्या होनी चाहिए ..
लेकिन ग्वालियर में मान्यता नियमों का पालन होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है ..स्कूल शिक्षा विभाग भी BRC की रिपोर्ट पर भरोसा करके ऐसे स्कूलों के संचालन को बढ़ावा दे रहा है, जिससे अभिभावक और छात्र छात्राओं का हित प्रभावित हो रहा है ।

आपको बता दें, कि ग्वालियर जिले में करीब 1400 से अधिक एमपी बोर्ड और सीबीएसई के पाठ्यक्रम वाले निजी स्कूल संचालित हैं.. सबको सर्व शिक्षा अभियान के तहत मध्य प्रदेश सरकार के डीपीसी कार्यालय से मान्यता लेनी पड़ती है ।
लेकिन ग्वालियर के थाटीपुर ,मयूर मार्केट क्षेत्र में स्थित SSI यूनिवर्सल मिडिल स्कूल सहित सैकड़ों ऐसे स्कूल संचालित है ,जो सिर्फ 1000 स्क्वायर फीट के स्थान में संचालित हो रहे हैं ..ना यहां का कक्षाओं के लिए जगह है.. ना प्राचार्य व स्टॉफ के लिए। इसके अलावा इसी परिसर में मिठाई की दुकान और एक कंप्यूटर सेंटर सहित अनेक गतिविधियां संचालित हो रही है… खेल के मैदान होने का तो सवाल ही नहीं उठता है। ग्वालियर के अनेक स्थानो पर इसी तरह की स्थिति दिखाई देती है ..

“””ग्वालियर में निजी स्कूलों के संचालन नियम का पालन होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है.. लेकिन ऐसे स्कूलों को मान्यता हर साल मिल जाती है। Ssi यूनिवर्सल जैसे अनेकों स्कूल है जो छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।””
– अश्वनी कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता

संपूर्ण मध्य प्रदेश की तरह ग्वालियर जिले में भी स्कूलों की मॉनिटरिंग खासकर स्कूल निजी स्कूलों की मॉनिटरिंग का जिम्मा स्कूल शिक्षा विभाग के अधीन जिला शिक्षा अधिकारी और डीपीसी का होता है ।लेकिन अब मान्यता नियमों में संशोधन होने के कारण जिला शिक्षा अधिकारी से हटकर मान्यता देने की जिम्मेदारी सर्व शिक्षा अभियान के तहत डीपीसी कार्यालय के पास आ गई है। लेकिन स्पष्ट रूप से दोनों विभाग एक दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं ..लेकिन ऐसे स्कूलों पर कार्रवाई का भरोसा जिले की कलेक्टर और डीपीसी रविंद्र सिंह तोमर ने दिया है . उन्होंने बीआरसी से जांच कराने के निर्देश भी दिए हैं।
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